Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 1900 पारण समय 05:32–06:19, रवि 4 नवंबर
व्रत · समय UTC−3 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 1900 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 4 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- शनिवार 3 नवंबर
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05:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 4 नवंबर
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05:32–06:19पारण समयव्रत खोलने का समय
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 1900 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी शनि 3 नवंबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी शनि 3 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:18 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:18 शुक्र से 09:26 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 3 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:26: शनि 3 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:18 शुक्र पर, उससे (03:50–05:26) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 4 नवंबर, 05:32–06:19
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 3 नवंबर 09:26 से रवि 4 नवंबर 06:13 तक है; हरिवासर 14:38 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 4 नवंबर को सूर्योदय (05:26) से होता है।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।