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Pāthardi, महाराष्ट्र में पौष पुत्रदा एकादशी 2021 पारण समय 07:05⁠–⁠18:18, सोम 25 जनवरी

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में पौष पुत्रदा एकादशी 2021 कब है?

रविवार 24 जनवरी

पौष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में रवि 24 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 25 जनवरी

पारण समय
07:05–18:18
11 घं 13 मि · Tithika की परिपाटी

पौष पुत्रदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 24 जनवरी
  • 07:05व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 25 जनवरी
  • 07:05–18:18पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपौष पुत्रदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में पौष पुत्रदा एकादशी रवि 24 जनवरी को क्यों है?

पौष पुत्रदा एकादशी रवि 24 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:56 शनि से 22:58 तक।

एकादशी 22:58 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 24 जनवरी को सूर्योदय पर है, 07:05: रवि 24 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:56 शनि पर, उससे (05:29–07:05) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 25 जनवरी, 07:05–18:18 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 24 जनवरी 22:58 से मंगल 26 जनवरी 00:25 तक है; हरिवासर 05:20 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 25 जनवरी को सूर्योदय (07:05) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:18) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:19 तक, करते हैं।

नियम

पौष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।