tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पौष पुत्रदा एकादशी 1908 पारण समय 07:39⁠–⁠18:54, मंगल 14 जनवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पौष पुत्रदा एकादशी 1908 कब है?

सोमवार 13 जनवरी

पौष शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 13 जनवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 14 जनवरी

पारण समय
07:39–18:54
11 घं 15 मि · Tithika की परिपाटी

पौष पुत्रदा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 13 जनवरी
  • 05:48व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 14 जनवरी
  • 07:39–18:54पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपौष पुत्रदा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पौष पुत्रदा एकादशी सोम 13 जनवरी को क्यों है?

पौष पुत्रदा एकादशी सोम 13 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:37 रवि से 01:04 मंगल तक।

एकादशी 01:04 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 13 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: सोम 13 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:37 रवि पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 14 जनवरी, 07:39–18:54 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 14 जनवरी 01:04 से बुध 15 जनवरी 03:00 तक है; हरिवासर 07:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:47) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:19 तक, करते हैं।

नियम

पौष शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।