tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 2100 सोम 13 सितंबर या मंगल 14 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 2100 कब है?

स्मार्त

सोमवार 13 सितंबर

वैष्णव

मंगलवार 14 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

Ipameri में सोम 13 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 14 सितंबर

पारण समय
11:52–18:07
6 घं 15 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 15 सितंबर

पारण समय
04:32–05:52
1 घं 20 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 13 सितंबर
  • 06:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 14 सितंबर
  • 11:52–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 14 सितंबर
  • 06:09व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 15 सितंबर
  • 04:32–05:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी सोम 13 सितंबर या मंगल 14 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी सोम 13 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 14 सितंबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:21 से। एकादशी: 06:21 से 05:52 मंगल तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:52 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:21 सोम से 05:52 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 13 सितंबर को 06:21 पर, उस सूर्योदय (06:10) के बाद, लगती है और मंगल 14 सितंबर को 05:52 पर, अगले सूर्योदय (06:09 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 13 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 13 सितंबर को अरुणोदय (04:34–06:10) में दशमी है। मंगल 14 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:52 तक, फिर द्वादशी): मंगल 14 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 14 सितंबर, 11:52–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 14 सितंबर 05:52 से बुध 15 सितंबर 05:52 तक है; हरिवासर 11:52 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:32 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 15 सितंबर, 04:32–05:52 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 15 सितंबर को 05:52 पर, अरुणोदय (04:32) लगने के बाद और सूर्योदय (06:08) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।