Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 2068 शुक्र 7 सितंबर या शनि 8 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में पार्श्व एकादशी 2068 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 7 सितंबर
वैष्णव
शनिवार 8 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
Ipameri में शुक्र 7 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 8 सितंबर
वैष्णव · रविवार 9 सितंबर
पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 7 सितंबर
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06:14व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 8 सितंबर
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09:10–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 8 सितंबर
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06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 9 सितंबर
-
06:12–18:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में पार्श्व एकादशी शुक्र 7 सितंबर या शनि 8 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी शुक्र 7 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शनि 8 सितंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:48 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:48 से 03:50 शनि तक।
एकादशी 03:50 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:48 शुक्र से 03:50 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 7 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:14: शुक्र 7 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 7 सितंबर को दशमी 05:48 तक है, अरुणोदय (04:38–06:14) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:50 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शनि 8 सितंबर को व्रत रखते हैं: शनि 8 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 8 सितंबर, 09:10–18:07 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 8 सितंबर 03:50 से रवि 9 सितंबर 01:09 तक है; हरिवासर 09:10 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:07) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:36 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 9 सितंबर, 06:12–18:07 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 9 सितंबर को 01:09 पर, रात में, अरुणोदय (04:36) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:12) से सूर्यास्त (18:07) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।