tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 2040 रवि 16 सितंबर या सोम 17 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 2040 कब है?

स्मार्त

रविवार 16 सितंबर

वैष्णव

सोमवार 17 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

Ipameri में रवि 16 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · सोमवार 17 सितंबर

पारण समय
07:53–18:08
10 घं 15 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · मंगलवार 18 सितंबर

पारण समय
06:05–18:08
12 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • रविवार 16 सितंबर
  • 06:06व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 17 सितंबर
  • 07:53–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • सोमवार 17 सितंबर
  • 06:06व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 18 सितंबर
  • 06:05–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी रवि 16 सितंबर या सोम 17 सितंबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी रवि 16 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 17 सितंबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:30 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:30 से 02:39 सोम तक।

एकादशी 02:39 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:30 रवि से 02:39 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 16 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:06: रवि 16 सितंबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 16 सितंबर को दशमी 05:30 तक है, अरुणोदय (04:30–06:06) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:39 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 17 सितंबर को व्रत रखते हैं: सोम 17 सितंबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · सोम 17 सितंबर, 07:53–18:08 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 17 सितंबर 02:39 से सोम 17 सितंबर 23:36 तक है; हरिवासर 07:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:08) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं।

वैष्णव · मंगल 18 सितंबर, 06:05–18:08 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी मंगल 18 सितंबर को 23:36 सोम पर, रात में, अरुणोदय (04:29) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:05) से सूर्यास्त (18:08) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।