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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पार्श्व एकादशी 2028 पारण समय 06:26⁠–⁠19:33, गुरु 31 अगस्त

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में पार्श्व एकादशी 2028 कब है?

बुधवार 30 अगस्त

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में बुध 30 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 31 अगस्त

पारण समय
06:26–19:33
13 घं 7 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 30 अगस्त
  • 06:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 31 अगस्त
  • 06:26–19:33पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पार्श्व एकादशी बुध 30 अगस्त को क्यों है?

पार्श्व एकादशी बुध 30 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:01 मंगल से 19:17 तक।

एकादशी 19:17 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 30 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:25: बुध 30 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:01 मंगल पर, उससे (04:49–06:25) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 31 अगस्त, 06:26–19:33 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 30 अगस्त 19:17 से गुरु 31 अगस्त 21:01 तक है; हरिवासर 01:43 पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 31 अगस्त को सूर्योदय (06:26) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:33) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:03 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।