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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पार्श्व एकादशी 2026 पारण समय 06:48⁠–⁠18:55, बुध 23 सितंबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में पार्श्व एकादशी 2026 कब है?

मंगलवार 22 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में मंगल 22 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 23 सितंबर

पारण समय
06:48–18:55
12 घं 7 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 22 सितंबर
  • 06:47व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 23 सितंबर
  • 06:48–18:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पार्श्व एकादशी मंगल 22 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी मंगल 22 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:31 सोम से 20:13 तक।

एकादशी 20:13 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 22 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:47: मंगल 22 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:31 सोम पर, उससे (05:11–06:47) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 23 सितंबर, 06:48–18:55 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 22 सितंबर 20:13 से बुध 23 सितंबर 21:21 तक है; हरिवासर 02:30 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 23 सितंबर को सूर्योदय (06:48) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:55) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:13 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।