Myjava, स्लोवाकिया में पार्श्व एकादशी 2021 गुरु 16 सितंबर या शुक्र 17 सितंबर
व्रत · समय CEST में
Myjava में पार्श्व एकादशी 2021 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 16 सितंबर
वैष्णव
शुक्रवार 17 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
Myjava में गुरु 16 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 17 सितंबर
वैष्णव · शनिवार 18 सितंबर
पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 16 सितंबर
-
06:27व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 17 सितंबर
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10:19–18:58पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 17 सितंबर
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06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 18 सितंबर
-
06:30–18:55पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Myjava में पार्श्व एकादशी गुरु 16 सितंबर या शुक्र 17 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी गुरु 16 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 17 सितंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 06:06 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:06 से 04:38 शुक्र तक।
एकादशी 04:38 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:06 गुरु से 04:38 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 16 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:27: गुरु 16 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 16 सितंबर को दशमी 06:06 तक है, अरुणोदय (04:51–06:27) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 04:38 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 17 सितंबर को व्रत रखते हैं: शुक्र 17 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 17 सितंबर, 10:19–18:58 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 17 सितंबर 04:38 से शनि 18 सितंबर 03:24 तक है; हरिवासर 10:19 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:58) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:58 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 18 सितंबर, 06:30–18:55 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 18 सितंबर को 03:24 पर, रात में, अरुणोदय (04:54) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:30) से सूर्यास्त (18:55) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।