tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 2012 पारण समय 05:58⁠–⁠18:09, बुध 26 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 2012 कब है?

मंगलवार 25 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 25 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 26 सितंबर

पारण समय
05:58–18:09
12 घं 11 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 25 सितंबर
  • 05:59व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 26 सितंबर
  • 05:58–18:09पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी मंगल 25 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी मंगल 25 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:57 से 00:01 बुध तक।

एकादशी 00:01 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 25 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:59: मंगल 25 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:57 पर, उससे (04:23–05:59) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 26 सितंबर, 05:58–18:09 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 26 सितंबर 00:01 से बुध 26 सितंबर 23:27 तक है; हरिवासर 05:53 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 26 सितंबर को सूर्योदय (05:58) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:09) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:24 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।