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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 2008 पारण समय 06:10⁠–⁠07:15, शुक्र 12 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 2008 कब है?

गुरुवार 11 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 11 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 12 सितंबर

पारण समय
06:10–07:15
1 घं 5 मि

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 11 सितंबर
  • 06:11व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 12 सितंबर
  • 06:10–07:15पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी गुरु 11 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी गुरु 11 सितंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 04:42 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:42 से 06:17 गुरु तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:42 बुध से 06:17 तक।

द्वादशी: 06:17 गुरु से 07:15 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, बुध 10 सितंबर को 06:12 और गुरु 11 सितंबर को 06:11। एकादशी (बुध 10 सितंबर 04:42 से गुरु 11 सितंबर 06:17 तक) और द्वादशी (गुरु 11 सितंबर 06:17 से शुक्र 12 सितंबर 07:15 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: गुरु 11 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: बुध 10 सितंबर को दशमी 04:42 तक है, उसके भीतर (04:36–06:12); गुरु 11 सितंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 12 सितंबर, 06:10–07:15

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 11 सितंबर 06:17 से शुक्र 12 सितंबर 07:15 तक है; हरिवासर 12:31 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 12 सितंबर को सूर्योदय (06:10) से होता है।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।