tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 2002 पारण समय 10:10⁠–⁠18:08, मंगल 17 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 2002 कब है?

सोमवार 16 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 16 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 17 सितंबर

पारण समय
10:10–18:08
7 घं 58 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 16 सितंबर
  • 06:07व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 17 सितंबर
  • 10:10–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी सोम 16 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी सोम 16 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:58 से 03:51 मंगल तक।

एकादशी 03:51 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:58 सोम से 03:51 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 16 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:07: सोम 16 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:58 पर, उससे (04:31–06:07) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 17 सितंबर, 10:10–18:08 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 17 सितंबर 03:51 से बुध 18 सितंबर 05:09 तक है; हरिवासर 10:10 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:08) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:31 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।