Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 1987 गुरु 3 सितंबर या शुक्र 4 सितंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में पार्श्व एकादशी 1987 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 3 सितंबर
वैष्णव
शुक्रवार 4 सितंबर
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
Ipameri में गुरु 3 सितंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 4 सितंबर
वैष्णव · शनिवार 5 सितंबर
पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 3 सितंबर
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06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 4 सितंबर
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09:35–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 4 सितंबर
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06:17व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 5 सितंबर
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06:17–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में पार्श्व एकादशी गुरु 3 सितंबर या शुक्र 4 सितंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पार्श्व एकादशी गुरु 3 सितंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 4 सितंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:21 से। एकादशी: 07:21 से 04:24 शुक्र तक।
एकादशी 04:24 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:21 गुरु से 04:24 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 3 सितंबर को 07:21 पर, उस सूर्योदय (06:18) के बाद, लगती है और शुक्र 4 सितंबर को 04:24 पर, अगले सूर्योदय (06:17 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 3 सितंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 3 सितंबर को अरुणोदय (04:42–06:18) में दशमी है। शुक्र 4 सितंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:24 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 4 सितंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 4 सितंबर, 09:35–18:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 4 सितंबर 04:24 से शनि 5 सितंबर 01:10 तक है; हरिवासर 09:35 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:39 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 5 सितंबर, 06:17–18:06 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 5 सितंबर को 01:10 पर, रात में, अरुणोदय (04:41) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:17) से सूर्यास्त (18:06) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
भाद्रपद शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।