tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 1983 पारण समय 06:06⁠–⁠18:08, रवि 18 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 1983 कब है?

शनिवार 17 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 17 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 18 सितंबर

पारण समय
06:06–18:08
12 घं 2 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 17 सितंबर
  • 06:07व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 18 सितंबर
  • 06:06–18:08पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी शनि 17 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी शनि 17 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:17 शुक्र से 18:47 तक।

एकादशी 18:47 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 17 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:07: शनि 17 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:17 शुक्र पर, उससे (04:31–06:07) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 18 सितंबर, 06:06–18:08 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 17 सितंबर 18:47 से रवि 18 सितंबर 21:18 तक है; हरिवासर 01:25 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 18 सितंबर को सूर्योदय (06:06) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:08) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।