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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 1946 पारण समय 06:14⁠–⁠08:14, रवि 8 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 1946 कब है?

शनिवार 7 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 7 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 8 सितंबर

पारण समय
06:14–08:14
2 घं 0 मि

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 7 सितंबर
  • 06:15व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 8 सितंबर
  • 06:14–08:14पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी शनि 7 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी शनि 7 सितंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:43 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:43 से 07:18 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:43 शुक्र से 07:18 तक।

द्वादशी: 07:18 शनि से 08:14 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 6 सितंबर को 06:16 और शनि 7 सितंबर को 06:15। एकादशी (शुक्र 6 सितंबर 05:43 से शनि 7 सितंबर 07:18 तक) और द्वादशी (शनि 7 सितंबर 07:18 से रवि 8 सितंबर 08:14 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 7 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 6 सितंबर को दशमी 05:43 तक है, उसके भीतर (04:40–06:16); शनि 7 सितंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 8 सितंबर, 06:14–08:14

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 7 सितंबर 07:18 से रवि 8 सितंबर 08:14 तक है; हरिवासर 13:32 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 8 सितंबर को सूर्योदय (06:14) से होता है।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।