tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पार्श्व एकादशी 1908 पारण समय 06:15⁠–⁠18:06, सोम 7 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पार्श्व एकादशी 1908 कब है?

रविवार 6 सितंबर

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 6 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 7 सितंबर

पारण समय
06:15–18:06
11 घं 51 मि · Tithika की परिपाटी

पार्श्व एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 6 सितंबर
  • 06:16व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 7 सितंबर
  • 06:15–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपार्श्व एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पार्श्व एकादशी रवि 6 सितंबर को क्यों है?

पार्श्व एकादशी रवि 6 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:08 से 23:32 तक।

एकादशी 23:32 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 6 सितंबर को सूर्योदय पर है, 06:09: रवि 6 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:08 पर, उससे (04:33–06:09) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 7 सितंबर, 06:15–18:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 6 सितंबर 23:32 से सोम 7 सितंबर 20:25 तक है; हरिवासर 04:46 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 7 सितंबर को सूर्योदय (06:08) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:00) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:31 तक, करते हैं।

नियम

भाद्रपद शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।