Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में परमा एकादशी 2086 मंगल 9 अप्रैल या बुध 10 अप्रैल
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में परमा एकादशी 2086 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 9 अप्रैल
वैष्णव
बुधवार 10 अप्रैल
अधिक मास की कृष्ण एकादशी
Ipameri में मंगल 9 अप्रैल का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 10 अप्रैल
वैष्णव · गुरुवार 11 अप्रैल
परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 9 अप्रैल
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06:20व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 10 अप्रैल
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09:15–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 10 अप्रैल
-
06:21व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 11 अप्रैल
-
06:21–18:05पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में परमा एकादशी मंगल 9 अप्रैल या बुध 10 अप्रैल को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में परमा एकादशी मंगल 9 अप्रैल को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव बुध 10 अप्रैल को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:55 से। एकादशी: 06:55 से 04:04 बुध तक।
एकादशी 04:04 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:55 मंगल से 04:04 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह मंगल 9 अप्रैल को 06:55 पर, उस सूर्योदय (06:20) के बाद, लगती है और बुध 10 अप्रैल को 04:04 पर, अगले सूर्योदय (06:21 बुध) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: मंगल 9 अप्रैल।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 9 अप्रैल को अरुणोदय (04:44–06:20) में दशमी है। बुध 10 अप्रैल को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:04 तक, फिर द्वादशी): बुध 10 अप्रैल।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 10 अप्रैल, 09:15–18:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 10 अप्रैल 04:04 से गुरु 11 अप्रैल 00:47 तक है; हरिवासर 09:15 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · गुरु 11 अप्रैल, 06:21–18:05 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 11 अप्रैल को 00:47 पर, रात में, अरुणोदय (04:45) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:21) से सूर्यास्त (18:05) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
अधिक मास की कृष्ण एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।