tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में परमा एकादशी 2056 पारण समय 10:08⁠–⁠17:49, बुध 10 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में परमा एकादशी 2056 कब है?

मंगलवार 9 मई

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 9 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 10 मई

पारण समय
10:08–17:49
7 घं 41 मि · Tithika की परिपाटी

परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 9 मई
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 10 मई
  • 10:08–17:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में परमा एकादशी मंगल 9 मई को क्यों है?

परमा एकादशी मंगल 9 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:31 से 03:34 बुध तक।

एकादशी 03:34 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 01:31 मंगल से 03:34 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 9 मई को सूर्योदय पर है, 06:28: मंगल 9 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:31 पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 10 मई, 10:08–17:49 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 10 मई 03:34 से गुरु 11 मई 05:52 तक है; हरिवासर 10:08 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:49) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:45 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।