tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में परमा एकादशी 2053 शुक्र 11 जुलाई या शनि 12 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में परमा एकादशी 2053 कब है?

स्मार्त

शुक्रवार 11 जुलाई

वैष्णव

शनिवार 12 जुलाई

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

Ipameri में शुक्र 11 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शनिवार 12 जुलाई

पारण समय
10:04–17:53
7 घं 49 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · रविवार 13 जुलाई

पारण समय
06:44–17:53
11 घं 9 मि · Tithika की परिपाटी

परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • शुक्रवार 11 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 12 जुलाई
  • 10:04–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शनिवार 12 जुलाई
  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 13 जुलाई
  • 06:44–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में परमा एकादशी शुक्र 11 जुलाई या शनि 12 जुलाई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में परमा एकादशी शुक्र 11 जुलाई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 12 जुलाई को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:27 से। एकादशी: 07:27 से 04:52 शनि तक।

एकादशी 04:52 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:27 शुक्र से 04:52 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 11 जुलाई को 07:27 पर, उस सूर्योदय (06:44) के बाद, लगती है और शनि 12 जुलाई को 04:52 पर, अगले सूर्योदय (06:44 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 11 जुलाई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 11 जुलाई को अरुणोदय (05:08–06:44) में दशमी है। शनि 12 जुलाई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:52 तक, फिर द्वादशी): शनि 12 जुलाई।

व्रत का पारण

स्मार्त · शनि 12 जुलाई, 10:04–17:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 12 जुलाई 04:52 से रवि 13 जुलाई 01:42 तक है; हरिवासर 10:04 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:57 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · रवि 13 जुलाई, 06:44–17:53 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 13 जुलाई को 01:42 पर, रात में, अरुणोदय (05:08) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:44) से सूर्यास्त (17:53) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।