tithika
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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में परमा एकादशी 2023 पारण समय 11:29⁠–⁠20:02, शनि 12 अगस्त

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में परमा एकादशी 2023 कब है?

शुक्रवार 11 अगस्त

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शुक्र 11 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 12 अगस्त

पारण समय
11:29–20:02
8 घं 33 मि · Tithika की परिपाटी

परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 11 अगस्त
  • 06:06व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 12 अगस्त
  • 11:29–20:02पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में परमा एकादशी शुक्र 11 अगस्त को क्यों है?

परमा एकादशी शुक्र 11 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:36 से 05:02 शनि तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:02 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:36 शुक्र से 05:02 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 11 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:06: शुक्र 11 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:36 पर, उससे (04:30–06:06) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 12 अगस्त, 11:29–20:02 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 12 अगस्त 05:02 से रवि 13 अगस्त 06:50 तक है; हरिवासर 11:29 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:02) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।