tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में परमा एकादशी 1999 बुध 9 जून या गुरु 10 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में परमा एकादशी 1999 कब है?

स्मार्त

बुधवार 9 जून

वैष्णव

गुरुवार 10 जून

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

Ipameri में बुध 9 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · गुरुवार 10 जून

पारण समय
11:40–17:44
6 घं 4 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शुक्रवार 11 जून

पारण समय
06:39–17:44
11 घं 5 मि · Tithika की परिपाटी

परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • बुधवार 9 जून
  • 06:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 10 जून
  • 11:40–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • गुरुवार 10 जून
  • 06:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 11 जून
  • 06:39–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में परमा एकादशी बुध 9 जून या गुरु 10 जून को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में परमा एकादशी बुध 9 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव गुरु 10 जून को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 09:15 से।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:29 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 09:15 बुध से 06:29 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह बुध 9 जून को 09:15 पर, उस सूर्योदय (06:39) के बाद, लगती है और गुरु 10 जून को 06:29 पर, अगले सूर्योदय (06:39 गुरु) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: बुध 9 जून।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 9 जून को अरुणोदय (05:03–06:39) में दशमी है। गुरु 10 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 06:29 तक, फिर द्वादशी): गुरु 10 जून।

व्रत का पारण

स्मार्त · गुरु 10 जून, 11:40–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 10 जून 06:29 से शुक्र 11 जून 03:13 तक है; हरिवासर 11:40 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:52 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शुक्र 11 जून, 06:39–17:44 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शुक्र 11 जून को 03:13 पर, रात में, अरुणोदय (05:03) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:39) से सूर्यास्त (17:44) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।