tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में परमा एकादशी 1966 पारण समय 06:33⁠–⁠18:02, शनि 13 अगस्त

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में परमा एकादशी 1966 कब है?

शुक्रवार 12 अगस्त

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 12 अगस्त का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 13 अगस्त

पारण समय
06:33–18:02
11 घं 29 मि · Tithika की परिपाटी

परमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 12 अगस्त
  • 06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 13 अगस्त
  • 06:33–18:02पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में परमा एकादशी शुक्र 12 अगस्त को क्यों है?

परमा एकादशी शुक्र 12 अगस्त को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:10 गुरु से 20:47 तक।

एकादशी 20:47 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 12 अगस्त को सूर्योदय पर है, 06:33: शुक्र 12 अगस्त। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:10 गुरु पर, उससे (04:57–06:33) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 13 अगस्त, 06:33–18:02 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 12 अगस्त 20:47 से शनि 13 अगस्त 18:37 तक है; हरिवासर 02:15 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 13 अगस्त को सूर्योदय (06:33) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:02) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:51 तक, करते हैं।

नियम

अधिक मास की कृष्ण एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।