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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 2088 सोम 25 अक्टूबर या मंगल 26 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 2088 कब है?

स्मार्त

सोमवार 25 अक्टूबर

वैष्णव

मंगलवार 26 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

Ipameri में सोम 25 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 26 अक्टूबर

पारण समय
11:13–18:17
7 घं 4 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 27 अक्टूबर

पारण समय
03:59–05:00
1 घं 1 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 25 अक्टूबर
  • 05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 26 अक्टूबर
  • 11:13–18:17पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 26 अक्टूबर
  • 05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 27 अक्टूबर
  • 03:59–05:00पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी सोम 25 अक्टूबर या मंगल 26 अक्टूबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी सोम 25 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव मंगल 26 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।

दशमी 04:51 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:51 से 05:18 मंगल तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:18 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 04:51 सोम से 05:18 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 25 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:36: सोम 25 अक्टूबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 25 अक्टूबर को दशमी 04:51 तक है, अरुणोदय (04:00–05:36) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:18 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव मंगल 26 अक्टूबर को व्रत रखते हैं: मंगल 26 अक्टूबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 26 अक्टूबर, 11:13–18:17 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 26 अक्टूबर 05:18 से बुध 27 अक्टूबर 05:00 तक है; हरिवासर 11:13 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:17) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:08 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 27 अक्टूबर, 03:59–05:00 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 27 अक्टूबर को 05:00 पर, अरुणोदय (03:59) लगने के बाद और सूर्योदय (05:35) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।