Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 2041 शनि 5 अक्टूबर या रवि 6 अक्टूबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में पापांकुशा एकादशी 2041 कब है?
स्मार्त
शनिवार 5 अक्टूबर
वैष्णव
रविवार 6 अक्टूबर
आश्विन शुक्ल एकादशी
Ipameri में शनि 5 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 6 अक्टूबर
वैष्णव · सोमवार 7 अक्टूबर
पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 5 अक्टूबर
-
05:51व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 6 अक्टूबर
-
09:56–18:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 6 अक्टूबर
-
05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 7 अक्टूबर
-
05:49–18:11पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में पापांकुशा एकादशी शनि 5 अक्टूबर या रवि 6 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी शनि 5 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव रवि 6 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:38 से। एकादशी: 07:38 से 04:45 रवि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 04:45 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:38 शनि से 04:45 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शनि 5 अक्टूबर को 07:38 पर, उस सूर्योदय (05:51) के बाद, लगती है और रवि 6 अक्टूबर को 04:45 पर, अगले सूर्योदय (05:50 रवि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 5 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 5 अक्टूबर को अरुणोदय (04:15–05:51) में दशमी है। रवि 6 अक्टूबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:45 तक, फिर द्वादशी): रवि 6 अक्टूबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 6 अक्टूबर, 09:56–18:11 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 6 अक्टूबर 04:45 से सोम 7 अक्टूबर 01:29 तक है; हरिवासर 09:56 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:11) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:18 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · सोम 7 अक्टूबर, 05:49–18:11 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 7 अक्टूबर को 01:29 पर, रात में, अरुणोदय (04:13) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:49) से सूर्यास्त (18:11) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आश्विन शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।