Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पापांकुशा एकादशी 2024 रवि 13 अक्टूबर या सोम 14 अक्टूबर
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में पापांकुशा एकादशी 2024 कब है?
स्मार्त
रविवार 13 अक्टूबर
वैष्णव
सोमवार 14 अक्टूबर
आश्विन शुक्ल एकादशी
Sevan में रवि 13 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 14 अक्टूबर
वैष्णव · मंगलवार 15 अक्टूबर
पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 13 अक्टूबर
-
07:09व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 14 अक्टूबर
-
10:27–18:21पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 14 अक्टूबर
-
07:10व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 15 अक्टूबर
-
07:11–18:19पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में पापांकुशा एकादशी रवि 13 अक्टूबर या सोम 14 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पापांकुशा एकादशी रवि 13 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 14 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:39 से। एकादशी: 07:39 से 05:11 सोम तक।
एकादशी 05:11 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:39 रवि से 05:11 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 13 अक्टूबर को 07:39 पर, उस सूर्योदय (07:09) के बाद, लगती है और सोम 14 अक्टूबर को 05:11 पर, अगले सूर्योदय (07:10 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 13 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 13 अक्टूबर को अरुणोदय (05:33–07:09) में दशमी है। सोम 14 अक्टूबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:11 तक, फिर द्वादशी): सोम 14 अक्टूबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 14 अक्टूबर, 10:27–18:21 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 14 अक्टूबर 05:11 से मंगल 15 अक्टूबर 02:12 तक है; हरिवासर 10:27 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:21) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:24 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 15 अक्टूबर, 07:11–18:19 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 15 अक्टूबर को 02:12 पर, रात में, अरुणोदय (05:35) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (07:11) से सूर्यास्त (18:19) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
आश्विन शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।