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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पापांकुशा एकादशी 2017 पारण समय 07:20⁠–⁠18:40, सोम 2 अक्टूबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में पापांकुशा एकादशी 2017 कब है?

रविवार 1 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में रवि 1 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 2 अक्टूबर

पारण समय
07:20–18:40
11 घं 20 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 1 अक्टूबर
  • 06:56व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 2 अक्टूबर
  • 07:20–18:40पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पापांकुशा एकादशी रवि 1 अक्टूबर को क्यों है?

पापांकुशा एकादशी रवि 1 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:06 से 01:14 सोम तक।

एकादशी 01:14 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 1 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 06:56: रवि 1 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:06 पर, उससे (05:20–06:56) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 2 अक्टूबर, 07:20–18:40 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 2 अक्टूबर 01:14 से मंगल 3 अक्टूबर 01:39 तक है; हरिवासर 07:20 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:40) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:18 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।