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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पापांकुशा एकादशी 2012 पारण समय 07:23⁠–⁠18:04, शुक्र 26 अक्टूबर

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में पापांकुशा एकादशी 2012 कब है?

गुरुवार 25 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 25 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 26 अक्टूबर

पारण समय
07:23–18:04
10 घं 41 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 25 अक्टूबर
  • 07:22व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 26 अक्टूबर
  • 07:23–18:04पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पापांकुशा एकादशी गुरु 25 अक्टूबर को क्यों है?

पापांकुशा एकादशी गुरु 25 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:52 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:52 बुध से 18:08 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 25 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 07:22: गुरु 25 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:52 बुध पर, उससे (05:46–07:22) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 26 अक्टूबर, 07:23–18:04 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 25 अक्टूबर 18:08 से शुक्र 26 अक्टूबर 18:54 तक है; हरिवासर 00:20 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 26 अक्टूबर को सूर्योदय (07:23) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:04) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:31 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।