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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1951 पारण समय 07:47⁠–⁠18:12, गुरु 11 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1951 कब है?

बुधवार 10 अक्टूबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 10 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 11 अक्टूबर

पारण समय
07:47–18:12
10 घं 25 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 10 अक्टूबर
  • 05:48व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 11 अक्टूबर
  • 07:47–18:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी बुध 10 अक्टूबर को क्यों है?

पापांकुशा एकादशी बुध 10 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:56 से 02:11 गुरु तक।

एकादशी 02:11 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:56 बुध से 02:11 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 10 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:48: बुध 10 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:56 पर, उससे (04:12–05:48) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 11 अक्टूबर, 07:47–18:12 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 11 अक्टूबर 02:11 से शुक्र 12 अक्टूबर 00:38 तक है; हरिवासर 07:47 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:12) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:16 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।