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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पापांकुशा एकादशी 1914 पारण समय 05:56⁠–⁠18:09, बुध 30 सितंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पापांकुशा एकादशी 1914 कब है?

मंगलवार 29 सितंबर

आश्विन शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 29 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 30 सितंबर

पारण समय
05:56–18:09
12 घं 13 मि · Tithika की परिपाटी

पापांकुशा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 29 सितंबर
  • 05:57व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 30 सितंबर
  • 05:56–18:09पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपापांकुशा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पापांकुशा एकादशी मंगल 29 सितंबर को क्यों है?

पापांकुशा एकादशी मंगल 29 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:49 सोम से 20:23 तक।

एकादशी 20:23 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 29 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:57: मंगल 29 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:49 सोम पर, उससे (04:21–05:57) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 30 सितंबर, 05:56–18:09 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 29 सितंबर 20:23 से बुध 30 सितंबर 21:27 तक है; हरिवासर 02:39 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 30 सितंबर को सूर्योदय (05:56) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:09) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:23 तक, करते हैं।

नियम

आश्विन शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।