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Pāthardi, महाराष्ट्र में पद्मिनी एकादशी 2026 पारण समय 05:51⁠–⁠07:57, गुरु 28 मई

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?

बुधवार 27 मई

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में बुध 27 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 28 मई

पारण समय
05:51–07:57
2 घं 6 मि

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 27 मई
  • 05:51व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 28 मई
  • 05:51–07:57पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में पद्मिनी एकादशी बुध 27 मई को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी बुध 27 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:11 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:11 से 06:22 बुध तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:11 मंगल से 06:22 तक।

द्वादशी: 06:22 बुध से 07:57 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 26 मई को 05:51 और बुध 27 मई को 05:51। एकादशी (मंगल 26 मई 05:11 से बुध 27 मई 06:22 तक) और द्वादशी (बुध 27 मई 06:22 से गुरु 28 मई 07:57 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 27 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: मंगल 26 मई को दशमी 05:11 तक है, उसके भीतर (04:15–05:51); बुध 27 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 28 मई, 05:51–07:57

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 27 मई 06:22 से गुरु 28 मई 07:57 तक है; हरिवासर 12:46 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 28 मई को सूर्योदय (05:51) से होता है।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।