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Myshkin, यरोस्लावी ओब्लास्ट, रूस में पद्मिनी एकादशी 2026 पारण समय 03:40⁠–⁠05:27, गुरु 28 मई

व्रत · समय MSK में

Myshkin में पद्मिनी एकादशी 2026 कब है?

बुधवार 27 मई

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Myshkin में बुध 27 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 28 मई

पारण समय
03:40–05:27
1 घं 47 मि

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 27 मई
  • 03:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 28 मई
  • 03:40–05:27पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Myshkin में पद्मिनी एकादशी बुध 27 मई को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी बुध 27 मई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 02:41 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:41 से 03:52 बुध तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:41 मंगल से 03:52 तक।

द्वादशी: 03:52 बुध से 05:27 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, मंगल 26 मई को 03:43 और बुध 27 मई को 03:41। एकादशी (मंगल 26 मई 02:41 से बुध 27 मई 03:52 तक) और द्वादशी (बुध 27 मई 03:52 से गुरु 28 मई 05:27 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: बुध 27 मई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: मंगल 26 मई को दशमी 02:41 तक है, उसके भीतर (02:07–03:43); बुध 27 मई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 28 मई, 03:40–05:27

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 27 मई 03:52 से गुरु 28 मई 05:27 तक है; हरिवासर 10:16 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 28 मई को सूर्योदय (03:40) से होता है।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।