tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पद्मिनी एकादशी 2048 बुध 25 मार्च या गुरु 26 मार्च

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पद्मिनी एकादशी 2048 कब है?

स्मार्त

बुधवार 25 मार्च

वैष्णव

गुरुवार 26 मार्च

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

Ipameri में बुध 25 मार्च का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · गुरुवार 26 मार्च

पारण समय
11:15–18:18
7 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शुक्रवार 27 मार्च

पारण समय
04:42–04:51
9 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • बुधवार 25 मार्च
  • 06:17व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 26 मार्च
  • 11:15–18:18पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • गुरुवार 26 मार्च
  • 06:18व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 27 मार्च
  • 04:42–04:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पद्मिनी एकादशी बुध 25 मार्च या गुरु 26 मार्च को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पद्मिनी एकादशी बुध 25 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 26 मार्च को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:06 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:06 से 05:24 गुरु तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 05:24 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:06 बुध से 05:24 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 25 मार्च को सूर्योदय पर है, 06:17: बुध 25 मार्च।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 25 मार्च को दशमी 05:06 तक है, अरुणोदय (04:41–06:17) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 05:24 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 26 मार्च को व्रत रखते हैं: गुरु 26 मार्च।

व्रत का पारण

स्मार्त · गुरु 26 मार्च, 11:15–18:18 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 26 मार्च 05:24 से शुक्र 27 मार्च 04:51 तक है; हरिवासर 11:15 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:18) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शुक्र 27 मार्च, 04:42–04:51 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शुक्र 27 मार्च को 04:51 पर, अरुणोदय (04:42) लगने के बाद और सूर्योदय (06:18) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।