Pāthardi, महाराष्ट्र में पद्मिनी एकादशी 2031 गुरु 28 अगस्त या शुक्र 29 अगस्त
महाराष्ट्र, भारत
व्रत · समय IST में
Pāthardi में पद्मिनी एकादशी 2031 कब है?
स्मार्त
गुरुवार 28 अगस्त
वैष्णव
शुक्रवार 29 अगस्त
अधिक मास की शुक्ल एकादशी
Pāthardi में गुरु 28 अगस्त का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 29 अगस्त
वैष्णव · शनिवार 30 अगस्त
पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 28 अगस्त
-
06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 29 अगस्त
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09:12–18:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 29 अगस्त
-
06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 30 अगस्त
-
06:13–18:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Pāthardi में पद्मिनी एकादशी गुरु 28 अगस्त या शुक्र 29 अगस्त को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पद्मिनी एकादशी गुरु 28 अगस्त को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 29 अगस्त को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:53 से। एकादशी: 06:53 से 04:00 शुक्र तक।
एकादशी 04:00 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:53 गुरु से 04:00 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 28 अगस्त को 06:53 पर, उस सूर्योदय (06:13) के बाद, लगती है और शुक्र 29 अगस्त को 04:00 पर, अगले सूर्योदय (06:13 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 28 अगस्त।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 28 अगस्त को अरुणोदय (04:37–06:13) में दशमी है। शुक्र 29 अगस्त को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:00 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 29 अगस्त।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 29 अगस्त, 09:12–18:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 29 अगस्त 04:00 से शनि 30 अगस्त 00:48 तक है; हरिवासर 09:12 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:44 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 30 अगस्त, 06:13–18:46 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 30 अगस्त को 00:48 पर, रात में, अरुणोदय (04:37) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:13) से सूर्यास्त (18:46) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
अधिक मास की शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।