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Pāthardi, महाराष्ट्र में पद्मिनी एकादशी 2029 पारण समय 06:27⁠–⁠18:41, मंगल 27 मार्च

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में पद्मिनी एकादशी 2029 कब है?

सोमवार 26 मार्च

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में सोम 26 मार्च का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 27 मार्च

पारण समय
06:27–18:41
12 घं 14 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 26 मार्च
  • 06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 27 मार्च
  • 06:27–18:41पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में पद्मिनी एकादशी सोम 26 मार्च को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी सोम 26 मार्च को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:37 रवि से 21:36 तक।

एकादशी 21:36 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 26 मार्च को सूर्योदय पर है, 06:28: सोम 26 मार्च। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:37 रवि पर, उससे (04:52–06:28) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 27 मार्च, 06:27–18:41 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 26 मार्च 21:36 से मंगल 27 मार्च 18:53 तक है; हरिवासर 02:55 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 27 मार्च को सूर्योदय (06:27) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:41) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:54 तक, करते हैं।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।