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Codcod, पश्चिमी विसाया, फिलिपींस में पद्मिनी एकादशी 2020 पारण समय 05:36⁠–⁠17:39, सोम 28 सितंबर

व्रत · समय PST में

Codcod में पद्मिनी एकादशी 2020 कब है?

रविवार 27 सितंबर

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Codcod में रवि 27 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 28 सितंबर

पारण समय
05:36–17:39
12 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 27 सितंबर
  • 05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 28 सितंबर
  • 05:36–17:39पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Codcod में पद्मिनी एकादशी रवि 27 सितंबर को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी रवि 27 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:30 शनि से 22:16 तक।

एकादशी 22:16 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+8)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 27 सितंबर को सूर्योदय पर है, 05:36: रवि 27 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:30 शनि पर, उससे (04:00–05:36) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 28 सितंबर, 05:36–17:39 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 27 सितंबर 22:16 से सोम 28 सितंबर 23:29 तक है; हरिवासर 04:34 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 28 सितंबर को सूर्योदय (05:36) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:39) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:00 तक, करते हैं।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।