tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पद्मिनी एकादशी 2004 मंगल 27 जुलाई या बुध 28 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पद्मिनी एकादशी 2004 कब है?

स्मार्त

मंगलवार 27 जुलाई

वैष्णव

बुधवार 28 जुलाई

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

Ipameri में मंगल 27 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · बुधवार 28 जुलाई

पारण समय
10:01–17:58
7 घं 57 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · गुरुवार 29 जुलाई

पारण समय
06:40–17:58
11 घं 18 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • मंगलवार 27 जुलाई
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 28 जुलाई
  • 10:01–17:58पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • बुधवार 28 जुलाई
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 29 जुलाई
  • 06:40–17:58पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पद्मिनी एकादशी मंगल 27 जुलाई या बुध 28 जुलाई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पद्मिनी एकादशी मंगल 27 जुलाई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव बुध 28 जुलाई को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:41 से। एकादशी: 07:41 से 04:50 बुध तक।

एकादशी 04:50 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:41 मंगल से 04:50 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह मंगल 27 जुलाई को 07:41 पर, उस सूर्योदय (06:40) के बाद, लगती है और बुध 28 जुलाई को 04:50 पर, अगले सूर्योदय (06:40 बुध) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: मंगल 27 जुलाई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 27 जुलाई को अरुणोदय (05:04–06:40) में दशमी है। बुध 28 जुलाई को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:50 तक, फिर द्वादशी): बुध 28 जुलाई।

व्रत का पारण

स्मार्त · बुध 28 जुलाई, 10:01–17:58 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 28 जुलाई 04:50 से गुरु 29 जुलाई 01:36 तक है; हरिवासर 10:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:58) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:56 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · गुरु 29 जुलाई, 06:40–17:58 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी गुरु 29 जुलाई को 01:36 पर, रात में, अरुणोदय (05:04) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:40) से सूर्यास्त (17:58) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।