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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पद्मिनी एकादशी 2001 पारण समय 07:54⁠–⁠12:16, शनि 29 सितंबर

व्रत · समय UTC+5 में

Sevan में पद्मिनी एकादशी 2001 कब है?

शुक्रवार 28 सितंबर

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में शुक्र 28 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 29 सितंबर

पारण समय
07:54–12:16
4 घं 22 मि

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 28 सितंबर
  • 07:53व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 29 सितंबर
  • 07:54–12:16पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पद्मिनी एकादशी शुक्र 28 सितंबर को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी शुक्र 28 सितंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 07:14 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:14 से 09:44 शुक्र तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:14 गुरु से 09:44 तक।

द्वादशी: 09:44 शुक्र से 12:16 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, गुरु 27 सितंबर को 07:52 और शुक्र 28 सितंबर को 07:53। एकादशी (गुरु 27 सितंबर 07:14 से शुक्र 28 सितंबर 09:44 तक) और द्वादशी (शुक्र 28 सितंबर 09:44 से शनि 29 सितंबर 12:16 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शुक्र 28 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: गुरु 27 सितंबर को दशमी 07:14 तक है, उसके भीतर (06:16–07:52); शुक्र 28 सितंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 29 सितंबर, 07:54–12:16

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 28 सितंबर 09:44 से शनि 29 सितंबर 12:16 तक है; हरिवासर 16:22 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 29 सितंबर को सूर्योदय (07:54) से होता है।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।