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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में पद्मिनी एकादशी 1982 पारण समय 11:27⁠–⁠19:46, बुध 29 सितंबर

व्रत · समय UTC+5 में

Sevan में पद्मिनी एकादशी 1982 कब है?

मंगलवार 28 सितंबर

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में मंगल 28 सितंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 29 सितंबर

पारण समय
11:27–19:46
8 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 28 सितंबर
  • 07:52व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 29 सितंबर
  • 11:27–19:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में पद्मिनी एकादशी मंगल 28 सितंबर को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी मंगल 28 सितंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:19 से 05:09 बुध तक।

एकादशी 05:09 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:19 मंगल से 05:09 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 28 सितंबर को सूर्योदय पर है, 07:52: मंगल 28 सितंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:19 पर, उससे (06:16–07:52) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 29 सितंबर, 11:27–19:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 29 सितंबर 05:09 से गुरु 30 सितंबर 06:22 तक है; हरिवासर 11:27 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 10:16 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।