tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पद्मिनी एकादशी 1961 गुरु 25 मई या शुक्र 26 मई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पद्मिनी एकादशी 1961 कब है?

स्मार्त

गुरुवार 25 मई

वैष्णव

शुक्रवार 26 मई

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

Ipameri में गुरु 25 मई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · शुक्रवार 26 मई

पारण समय
12:24–17:45
5 घं 21 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · शनिवार 27 मई

पारण समय
04:58–06:17
1 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • गुरुवार 25 मई
  • 06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 26 मई
  • 12:24–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • शुक्रवार 26 मई
  • 06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 27 मई
  • 04:58–06:17पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पद्मिनी एकादशी गुरु 25 मई या शुक्र 26 मई को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में पद्मिनी एकादशी गुरु 25 मई को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव शुक्र 26 मई को व्रत रखते हैं।

दशमी 05:49 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:49 से 06:27 शुक्र तक।

अरुणोदय में एकादशी केवल 06:27 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 05:49 गुरु से 06:27 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 25 मई को सूर्योदय पर है, 06:33: गुरु 25 मई।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 25 मई को दशमी 05:49 तक है, अरुणोदय (04:57–06:33) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 06:27 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव शुक्र 26 मई को व्रत रखते हैं: शुक्र 26 मई।

व्रत का पारण

स्मार्त · शुक्र 26 मई, 12:24–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 26 मई 06:27 से शनि 27 मई 06:17 तक है; हरिवासर 12:24 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:48 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · शनि 27 मई, 04:58–06:17 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)

द्वादशी शनि 27 मई को 06:17 पर, अरुणोदय (04:58) लगने के बाद और सूर्योदय (06:34) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।