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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पद्मिनी एकादशी 1928 पारण समय 06:40⁠–⁠10:02, रवि 29 जुलाई

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पद्मिनी एकादशी 1928 कब है?

शनिवार 28 जुलाई

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 28 जुलाई का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 29 जुलाई

पारण समय
06:40–10:02
3 घं 22 मि

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 28 जुलाई
  • 06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 29 जुलाई
  • 06:40–10:02पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पद्मिनी एकादशी शनि 28 जुलाई को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी शनि 28 जुलाई को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 05:47 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:47 से 08:06 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:47 शुक्र से 08:06 तक।

द्वादशी: 08:06 शनि से 10:02 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 27 जुलाई को 06:41 और शनि 28 जुलाई को 06:40। एकादशी (शुक्र 27 जुलाई 05:47 से शनि 28 जुलाई 08:06 तक) और द्वादशी (शनि 28 जुलाई 08:06 से रवि 29 जुलाई 10:02 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 28 जुलाई। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 27 जुलाई को दशमी 05:47 तक है, उसके भीतर (05:05–06:41); शनि 28 जुलाई को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 29 जुलाई, 06:40–10:02

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 28 जुलाई 08:06 से रवि 29 जुलाई 10:02 तक है; हरिवासर 14:35 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 29 जुलाई को सूर्योदय (06:40) से होता है।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।