tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पद्मिनी एकादशी 1915 पारण समय 06:24⁠–⁠17:56, सोम 26 अप्रैल

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पद्मिनी एकादशी 1915 कब है?

रविवार 25 अप्रैल

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 25 अप्रैल का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 26 अप्रैल

पारण समय
06:24–17:56
11 घं 32 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 25 अप्रैल
  • 06:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 26 अप्रैल
  • 06:24–17:56पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पद्मिनी एकादशी रवि 25 अप्रैल को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी रवि 25 अप्रैल को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:48 से 23:24 तक।

एकादशी 23:24 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 25 अप्रैल को सूर्योदय पर है, 06:24: रवि 25 अप्रैल। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:48 पर, उससे (04:48–06:24) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 26 अप्रैल, 06:24–17:56 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 25 अप्रैल 23:24 से सोम 26 अप्रैल 21:13 तक है; हरिवासर 04:51 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 26 अप्रैल को सूर्योदय (06:24) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:56) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:42 तक, करते हैं।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।