tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में पद्मिनी एकादशी 1907 पारण समय 06:10⁠–⁠18:42, रवि 24 फ़रवरी

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में पद्मिनी एकादशी 1907 कब है?

शनिवार 23 फ़रवरी

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 23 फ़रवरी का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 24 फ़रवरी

पारण समय
06:10–18:42
12 घं 32 मि · Tithika की परिपाटी

पद्मिनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 23 फ़रवरी
  • 06:09व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 24 फ़रवरी
  • 06:10–18:42पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंपद्मिनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में पद्मिनी एकादशी शनि 23 फ़रवरी को क्यों है?

पद्मिनी एकादशी शनि 23 फ़रवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:52 शुक्र से 22:18 तक।

एकादशी 22:18 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 23 फ़रवरी को सूर्योदय पर है, 06:03: शनि 23 फ़रवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:52 शुक्र पर, उससे (04:27–06:03) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 24 फ़रवरी, 06:10–18:42 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 23 फ़रवरी 22:18 से सोम 25 फ़रवरी 00:22 तक है; हरिवासर 04:49 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 24 फ़रवरी को सूर्योदय (06:03) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:35) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:34 तक, करते हैं।

नियम

अधिक मास की शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।