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दिफ्फा, नाइजर में निर्जला एकादशी 2027 पारण समय 05:42⁠–⁠18:37, मंगल 15 जून

व्रत · समय WAT में

दिफ्फा में निर्जला एकादशी 2027 कब है?

सोमवार 14 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

दिफ्फा में सोम 14 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 15 जून

पारण समय
05:42–18:37
12 घं 55 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 14 जून
  • 05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 15 जून
  • 05:42–18:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

दिफ्फा में निर्जला एकादशी सोम 14 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी सोम 14 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:42 रवि से 21:38 तक।

एकादशी 21:38 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+1)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 14 जून को सूर्योदय पर है, 05:42: सोम 14 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:42 रवि पर, उससे (04:06–05:42) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 15 जून, 05:42–18:37 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 14 जून 21:38 से मंगल 15 जून 22:01 तक है; हरिवासर 03:44 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 15 जून को सूर्योदय (05:42) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:37) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।