tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2085 पारण समय 10:01⁠–⁠17:44, सोम 4 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में निर्जला एकादशी 2085 कब है?

रविवार 3 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 3 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 4 जून

पारण समय
10:01–17:44
7 घं 43 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 3 जून
  • 06:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 4 जून
  • 10:01–17:44पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में निर्जला एकादशी रवि 3 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी रवि 3 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:42 से 04:05 सोम तक।

एकादशी 04:05 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:42 रवि से 04:05 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 3 जून को सूर्योदय पर है, 06:37: रवि 3 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:42 पर, उससे (05:01–06:37) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 4 जून, 10:01–17:44 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 4 जून 04:05 से मंगल 5 जून 03:46 तक है; हरिवासर 10:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:44) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:51 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।