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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2035 पारण समय 06:41⁠–⁠09:48, रवि 17 जून

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में निर्जला एकादशी 2035 कब है?

शनिवार 16 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 16 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 17 जून

पारण समय
06:41–09:48
3 घं 7 मि

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 16 जून
  • 06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 17 जून
  • 06:41–09:48पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में निर्जला एकादशी शनि 16 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी शनि 16 जून को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।

दशमी 06:21 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:21 से 07:54 शनि तक।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:21 शुक्र से 07:54 तक।

द्वादशी: 07:54 शनि से 09:48 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शुक्र 15 जून को 06:41 और शनि 16 जून को 06:41। एकादशी (शुक्र 15 जून 06:21 से शनि 16 जून 07:54 तक) और द्वादशी (शनि 16 जून 07:54 से रवि 17 जून 09:48 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: शनि 16 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शुक्र 15 जून को दशमी 06:21 तक है, उसके भीतर (05:05–06:41); शनि 16 जून को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 17 जून, 06:41–09:48

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 16 जून 07:54 से रवि 17 जून 09:48 तक है; हरिवासर 14:22 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 17 जून को सूर्योदय (06:41) से होता है।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।