tithika
English

Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में निर्जला एकादशी 2026 पारण समय 05:31⁠–⁠20:34, शुक्र 26 जून

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में निर्जला एकादशी 2026 कब है?

गुरुवार 25 जून

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 25 जून का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 26 जून

पारण समय
05:31–20:34
15 घं 3 मि · Tithika की परिपाटी

निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • गुरुवार 25 जून
  • 05:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 26 जून
  • 05:31–20:34पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंनिर्जला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Sevan में निर्जला एकादशी गुरु 25 जून को क्यों है?

निर्जला एकादशी गुरु 25 जून को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:42 बुध से 18:39 तक।

एकादशी 18:39 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 25 जून को सूर्योदय पर है, 05:30: गुरु 25 जून। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:42 बुध पर, उससे (03:54–05:30) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 26 जून, 05:31–20:34 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 25 जून 18:39 से शुक्र 26 जून 20:52 तक है; हरिवासर 01:13 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 26 जून को सूर्योदय (05:31) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:34) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:31 तक, करते हैं।

नियम

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।