Pāthardi, महाराष्ट्र में निर्जला एकादशी 2022 शुक्र 10 जून या शनि 11 जून
महाराष्ट्र, भारत
व्रत · समय IST में
Pāthardi में निर्जला एकादशी 2022 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 10 जून
वैष्णव
शनिवार 11 जून
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
Pāthardi में शुक्र 10 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 11 जून
वैष्णव · रविवार 12 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 10 जून
-
05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 11 जून
-
11:10–19:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 11 जून
-
05:50व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 12 जून
-
05:50–19:07पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Pāthardi में निर्जला एकादशी शुक्र 10 जून या शनि 11 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी शुक्र 10 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 11 जून को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:26 से। एकादशी: 07:26 से 05:46 शनि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:46 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:26 शुक्र से 05:46 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 10 जून को 07:26 पर, उस सूर्योदय (05:50) के बाद, लगती है और शनि 11 जून को 05:46 पर, अगले सूर्योदय (05:50 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 10 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 10 जून को अरुणोदय (04:14–05:50) में दशमी है। शनि 11 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:46 तक, फिर द्वादशी): शनि 11 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 11 जून, 11:10–19:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 11 जून 05:46 से रवि 12 जून 03:24 तक है; हरिवासर 11:10 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 12 जून, 05:50–19:07 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 12 जून को 03:24 पर, रात में, अरुणोदय (04:14) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:50) से सूर्यास्त (19:07) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।