Davinópolis, मरान्हाओ, ब्राज़िल में निर्जला एकादशी 2020 सोम 1 जून या मंगल 2 जून
व्रत · समय UTC−3 में
Davinópolis में निर्जला एकादशी 2020 कब है?
स्मार्त
सोमवार 1 जून
वैष्णव
मंगलवार 2 जून
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
Davinópolis में सोम 1 जून का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · मंगलवार 2 जून
वैष्णव · बुधवार 3 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- सोमवार 1 जून
-
06:12व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 2 जून
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08:50–18:02पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- मंगलवार 2 जून
-
06:13व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 3 जून
-
06:13–18:02पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Davinópolis में निर्जला एकादशी सोम 1 जून या मंगल 2 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी सोम 1 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 2 जून को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:27 से। एकादशी: 06:27 से 03:35 मंगल तक।
एकादशी 03:35 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:27 सोम से 03:35 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 1 जून को 06:27 पर, उस सूर्योदय (06:12) के बाद, लगती है और मंगल 2 जून को 03:35 पर, अगले सूर्योदय (06:13 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 1 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 1 जून को अरुणोदय (04:36–06:12) में दशमी है। मंगल 2 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:35 तक, फिर द्वादशी): मंगल 2 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · मंगल 2 जून, 08:50–18:02 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 2 जून 03:35 से बुध 3 जून 00:35 तक है; हरिवासर 08:50 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:02) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:34 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · बुध 3 जून, 06:13–18:02 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी बुध 3 जून को 00:35 पर, रात में, अरुणोदय (04:37) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:13) से सूर्यास्त (18:02) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।