Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में निर्जला एकादशी 2012 गुरु 31 मई या शुक्र 1 जून
व्रत · समय UTC+4 में
Sevan में निर्जला एकादशी 2012 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 1 जून
वैष्णव · शनिवार 2 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- गुरुवार 31 मई
-
05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 1 जून
-
10:15–20:24पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 1 जून
-
05:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 2 जून
-
05:31–20:25पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में निर्जला एकादशी गुरु 31 मई या शुक्र 1 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी गुरु 31 मई को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 1 जून को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:48 से। एकादशी: 07:48 से 05:02 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:02 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:48 गुरु से 05:02 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 31 मई को 07:48 पर, उस सूर्योदय (05:32) के बाद, लगती है और शुक्र 1 जून को 05:02 पर, अगले सूर्योदय (05:31 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 31 मई।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 31 मई को अरुणोदय (03:56–05:32) में दशमी है। शुक्र 1 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:02 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 1 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 1 जून, 10:15–20:24 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 1 जून 05:02 से शनि 2 जून 01:52 तक है; हरिवासर 10:15 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (20:24) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:30 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 2 जून, 05:31–20:25 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 2 जून को 01:52 पर, रात में, अरुणोदय (03:55) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:31) से सूर्यास्त (20:25) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।