Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में निर्जला एकादशी 2003 मंगल 10 जून या बुध 11 जून
व्रत · समय UTC+5 में
Sevan में निर्जला एकादशी 2003 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 11 जून
वैष्णव · गुरुवार 12 जून
निर्जला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 10 जून
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06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 11 जून
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10:39–21:30पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 11 जून
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06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 12 जून
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06:29–21:30पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Sevan में निर्जला एकादशी मंगल 10 जून या बुध 11 जून को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में निर्जला एकादशी मंगल 10 जून को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव बुध 11 जून को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:16 से। एकादशी: 08:16 से 05:26 बुध तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:26 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 08:16 मंगल से 05:26 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+5)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह मंगल 10 जून को 08:16 पर, उस सूर्योदय (06:29) के बाद, लगती है और बुध 11 जून को 05:26 पर, अगले सूर्योदय (06:29 बुध) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: मंगल 10 जून।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 10 जून को अरुणोदय (04:53–06:29) में दशमी है। बुध 11 जून को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:26 तक, फिर द्वादशी): बुध 11 जून।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 11 जून, 10:39–21:30 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 11 जून 05:26 से गुरु 12 जून 02:17 तक है; हरिवासर 10:39 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (21:30) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:29 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · गुरु 12 जून, 06:29–21:30 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 12 जून को 02:17 पर, रात में, अरुणोदय (04:53) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:29) से सूर्यास्त (21:30) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।